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सामान्य

भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद् (आई.सी.एच.आर.) की स्थापना भारत सरकार द्वारा 27 मार्च 1972 कॊ इतिहास में वस्तुपरक और वैज्ञानिक शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक स्वायत्त संगठन के रूप में की गई थी।

परिषद् का पहला उद्देश्य इतिहास शोध को उचित दिशा प्रदान करना और वस्तुपरक एवं वैज्ञानिक इतिहास लेखन को बढावा देना है। राष्ट्रीय एकता को बढावा देने तथा अपनी सांस्कृतिक धरोहर के सम्मान हेतु ऐतिहासिक शोध के महत्व को ध्यान में रखते हुए अन्धविश्वास , कठमुल्लावाद व पुनरूत्थानवाद की अन्धी स्वीकृति को अस्वीकार करने की दिशा मे विशेष ध्यान दॆना है | संस्था ज्ञापन पत्र (MOU) में परिषद् के यथानिर्धारित उद्देश्य है: इतिहासकारों को इकट्ठा करना; इनके बीच विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक मंच की व्यवस्था करना; इतिहास अनुसंधान कार्यक्रम और परियोजनाएं प्रायोजित करना ; ऐतिहासिक अनुसंधान कार्य मे लगे संस्थानों और सगंठनो की सहायता करना ; ऐतिहासिक अनुसंधान के लिए विभिन्न प्रकार की फॆलोशिप प्रदान और इनका प्रशासन करना ; देश के विभिन्न भागों मे अपने सेमिनार आयोजित करने के अलावा दोनों क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तरों पर संगोष्ठियां, कार्यशालाएं और सम्मेलन आयोजित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है | इतिहास के विषय में परिषद् का व्यापक दृष्टिकोण है ताकि इसके अन्तर्गत विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अर्थ-व्यवस्था, कला, साहित्य, दर्शन, पुरालेख विद्या, मुद्राशास्त्र, पुरातत्व, समाजार्थिक निर्माण प्रक्रियाओं तथा द्दृढ‌ ऐतिहासिक पक्ष व विषयों वाले सम्बद्ध विषयों के इतिहास को शामिल किया जा सके| ऐतिहासिक महत्व कॆ विषयों पर शोध पत्रिकाओं तथा अन्य प्रकाशनों को आर्थिक सहायता जारी रखने के अतिरिक्त परिषद् ने अपने प्रकाशनों को भी प्रकाशित किया है।

परिषद् द्वारा इसी क्रम में "दि इण्डियन हिस्टोरिकल रिव्यू" नामक छमाही पत्रिका का लगातार प्रकाशन हो रहा है।

प्रतिभा को आकर्षित करने तथा ऐतिहासिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से परिषद् के दो क्षेत्रीय केन्द्र गुवाहाटी (असम) और बंगलुरु (कर्नाटक) अपने-अपने संबंधित क्षेत्रों मे अपने कार्यकलाप जारी रखे सुचारु रुप सॆ चला रहे हैं |

अपनॆ पुस्तकालय एवम् दस्तावेज केन्द्रों - दिल्ली, बंगलुरु और गुवाहाटी का भी परिषद् रखरखाव और विस्तार कर रही है।

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